वेदान्तविद्या का अधिकारी होने के लिए क्या अपेक्षित है।
See Answer →साधनचतुष्ट्य को स्पष्ट कीजिए।
See Answer →वत्सविन्दरनिमित्तं क्षीरस्य यथा रुचिराज्ञस्य। पुरुषविमोक्षनिमित्तं तथा प्रवृत्तिः प्रधानस्य।।
See Answer →तत्र जरामरणकृतं दुःखं प्राप्नोति चेतनः पुरुषः। लिंगस्याविनिवृत्तस्तस्माद् दुःखं स्वभावेन।।
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ऊँः शब्दोऽध्यायं दुःखविधातास्त्रयः सुधात्नेतिः। दानं च सिद्धयोऽष्टि सिद्धेः पूर्वोऽङक्षस्त्रिविधः।।
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अध्यवस्यायो बुद्धिर्थमो ज्ञानं विराग ऐश्वर्यम्। सातत्त्विकमेतद्रूपं तमसमासमाद्विपर्यस्तम्।।
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गतिमदनित्यमव्यापि, सक्रियमनेकमाश्रितं लिंगम्। सावयवं परतंत्रं व्यक्तम्, विपरीतमव्यक्तम्।।
See Answer →प्रतिविषयाध्यावसयो दृष्टं त्रिविधमनुमनमाख्यातम्। तल्ल्लिङ्गलीङ्गी अंधकारमाप्त श्रुतिराप्तवचनन्तु।।
See Answer →जैन तत्वमीमांसा पर प्रकाश डालें।
See Answer →त्रिरत्न क्या है? स्पष्ट करें।
See Answer →जैन धर्म के शिक्षाओं को पर प्रकाश डालें।
See Answer →बौद्ध प्रमाणमीमांसा क्या है? स्पष्ट करें।
See Answer →बुद्ध के जीवन परिचय पर प्रकाश डालें।
See Answer →बौद्ध दर्शन के महत्वपूर्ण सिद्धांतों को स्पष्ट करें।
See Answer →जैनकालीन समाज और उनकी संस्कृति पर विस्तृत रूप से लिखें।
See Answer →जैन सम्प्रदाय क्या है? और उनके सिद्धांत कौन-कौन से हैं, विस्तृत रूप से प्रकाश डालें।
See Answer →बौद्ध दर्शन के सम्प्रदाय एवं सिद्धांतों को स्पष्ट करें।
See Answer →बौद्ध धर्म क्या है? चार ब्रहम विहारों का विस्तार रूप से वर्णन करें।
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