वैदिक देवताओं के स्वरूप का वर्णन करें।
See Answer →ब्रह्मण ग्रंथों का देशकाल एवं उनके प्रतिपाचा विषय को बताएं।
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वं कंसी अवतारने अक्षेतां मनसा रेगाने। यत्राधिसूरो विभाति कर देवाय हविषा विधेगा।।
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यझेन यक्षगयजन्त देवा तानि वरमणि प्रथमान्यसं। ते ह नानक महिमानः चन्तयत्र पूर्व साध्याः शान्ति देवाः
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येन कर्मण्यपतो गणेशिनो यशे कृष्णवन्ति विदेषु वीता। यदपूर्व यक्षगण्ताः प्रजानां तन्मे मनः शिवशङकल्पमतु।।
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यः सुञ्चते पचते युद्ध आ चिद वाजं दृश्य स किलाशी सत्यः। वयं त इन्द्र विश्वः प्रियासः सुबिरातो विदा देग।।
See Answer →इद्धता के प्रकार
See Answer →ब्रॉननब्रेनर का परिस्थितिकी तंत्र सिद्धांत
See Answer →संवेग,
See Answer →संवेगों का अर्थ और महत्व की व्याख्या कीजिए। सांवेगिक बुद्धि के संप्रत्यय पर चर्चा कीजिए।
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मावदता विकार के प्रकारों का वर्णन कीजिए। शायदशा विकार के कारण संबंधी कारक और उपचार की व्याख्या कीजिए।
See Answer →निर्णयन की प्रकृति और चरणों का वर्णन कीजिए। प्रभावी निर्णयन की रणनीतिओं की व्याख्या कीजिए।
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व्यक्तित्य के विभिन्न सिद्धांत पर चर्चा कीजिए। व्यक्तित्य पर भारतीय परिपेक्षा को भी दर्शाइए।
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आत्म और पहचान पर पालन-पोषण शैलियों एवं सामाजिक संरचनात्मक प्रभाव की चर्चा कीजिए।
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