Explain the factors responsible for the Opium Wars? Discuss the impact of the Opium Wars on China.
See Answer →स्वाधीनता आंदोलन और कबीर
See Answer →इतिहास ग्रंथों में कबीर
See Answer →चक्र और षट्चक्र
See Answer →नर्म और मासूम बालमन पर एक खरोंच पड़ गई थी जो समय के साथ-साथ ग्रंथि बन गयी थी। जब भी वह पच्चीस की संख्या पढ़ता या लिखता, उसे पच्चीस चौका डेढ सौ ही याद आता।
मेहतर टोले के इस निर्णय से ठाकुरों के मुहल्ले में हलचल मच जाती है। ठाकुरों के लिए यह बिल्कुल अप्रत्याशित स्थिति है। आज तक कभी भी ऐसा नहीं हुआ था कि कोई मेहतर खुल्लम-खुल्ला बागी बन जाए।
किसना ने जब गाय मरने का कारण पूछा तो ठाकुर को भी बताना ही था। ठाकुर मना नहीं कर सकता अब। ठाकुर गाय के मरने का कारण ठण्ड लगना बताता है। इसके बाद रघु ठाकुर उसे मरी गाय उठाकर कहीं फेंक आने के लिए कहता है। किसना बिना कोई जवाब दिये मुड़कर घर में वापिस चला जाता है।
हम दोनों भाई-बहनों का हाथ पकड़ के तीर की तरह उठकर चल दी थी। सुखदेव सिंह माँ पर हाथ उठाने के लिए झपटा था, लेकिन मेरी माँ ने शेरनी की तरह सामना किया था, बिना डरे !
See Answer →कबर के ब्रहम
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निर्गुन संत परंपरा का परिचय देते हुए कबीर का महत्त्व प्रतिपादित कीजिए। (ख) कबीर के काव्य में धार्मिक रूढ़ियों के विविध रूपों का सोदाहरण विश्लेषण कीजिए। (ग) कबीर के काव्य में निहित व्यंग्य के विविध रूपों का विवेचन कीजिए।
See Answer →जन धंधा रे जग धंधा, सब लोगनी जाण आंधी, लोभ मोह जेवदो लपटानी, बनहिं गांठि गयो फंदा। उच्च टीवी मंच रहता है, सासा पानी में रहता है। मैं पहाड़ पर डूब गया, मैं पानी में मर गया। जल जले, वृक्ष उबरे, बेसंद्रा सींचे। ऊपर, अंदर मूल फूलों के बिना, जो उन्हें जानते हैं वे अच्छे हैं। कबीर कहते हैं कि जो जानता है, अज्ञात कष्ट भारी है। हरि वाट बताउ जित्या, जानत की बलिहारी।।
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झगडा एक नवेरो राँम, जें तुम्ह अपने जन सूँ काँम ।। ब्रह्म बड़ा कि जिनि रू उपाया, बेद बड़ा कि जहाँ थें आया।। यह मन बड़ा कि जहाँ मन मानै, राम बड़ा कि रॉमहि जानें। कहै कबीर हूँ खरा उदास, तीरथ बड़े कि हरि के दास ।।
See Answer →विंसी जय कागद की गुड़िया, जब लग पवन तबै लग ओरिया।। गुड़िया की बातें बकवास करती है, कसम खाती है और रस्सी हिलाती है। पवन थकी गुड़िया ठहरे, सीसा वार घूनी रोए प्राणी। कबीर कहते हैं, 'भाजि सारंग पानी, नहिं तर हैहैं खैचा तनी।
See Answer →ऐसी जिंदगी किस काम की जो सिर्फ घृणा पर टिकी हो कायरपन की हद तक पत्थर बरसाये कमजोर पड़ोसी की छत पर।
यदि वेदों में लिखा होता ब्राह्मण ब्रहमा के पैर से हुए हैं पैदा ! उन्हें उपनयन का अधिकार नहीं तब, तुम्हारी निष्ठा क्या होती?
तुमने चुरा लिए हमारे विकास के रास्ते शिक्षा पर लगा दिए प्रतिबंध आखर पर आज रख दी है तुमने हमारी भागीदारी के लिए योग्यता की शर्त पर कब तक फेंकोगे तुम अपना यह मकड़जाल हम पर।
धर्म का प्रतिनिधि समाज का ठेकेदार बनकर रखा है मुझे दूर आज तक मन्दिर की दहलीज तक से शून्य से उत्पन्न अपात्र ठहराकर
बन्द किले से बाहर झाँक कर तो देखो बरफ पिघल रही है बछड़े मार रहे हैं फर्री
बैल धूप चबा रहे हैं और एकलव्य पुराने जंग लगे तीरों को आग में तपा रहा है
See Answer →मिर्गी
See Answer →ध्यान
See Answer →उलटा-यू
See Answer →तनाव के लक्षण
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