भृगुवै वारूणिः, वरूणं पितरमपु ससार अधीहि भगवा ब्रह्मेति। तस्मा एतत्प्रोवाच। अन्नं प्राणं चक्षुः क्षोत्र मनो वाचमिति। तं होवाच। यता वा इमानि भतू ानि जायन्ते येन जातानि जीवन्ति। यत्प्रयन्तभिसंविशन्ति । तद्विजिज्ञासस्य । तद् ब्रह्मति। स तपोऽतप्यत। स तपस्तप्त्वा ।
See Answer →अन्नं न निन्द्यात्, तद्दन म्। प्राणों वा अन्नम्। शरीरमन्नादम्। प्राण शरीरं प्रतिष्ठितम्। शरीरे प्राणः प्रतिष्ठितः। तदेतदन्नमन्ने प्रतिष्ठितम्। स य एतदन्नमन्ने प्रतिष्ठितं वेद प्रतितिष्ठति। अन्नवानन्नादो भवति। महान् भवति प्रजया पशुभिर्ब्र ह्मवर्चसेन। महान् कीर्त्या।
See Answer →वात, पित्त और कफ की प्रकृति का वर्णन कीजिए ।
See Answer →वर्षा ऋतु के अनुसार पथ्य और अपथ्य का वर्णन कीजिए ।
See Answer →कठोपनिषद् पर टिप्पणी लिखिए ।
See Answer →स्वस्थ दिनचर्या के लिए क्या आहार विहार है स्पष्ट कीजिए ।
See Answer →आयुर्वेद में स्वास्थय के मलू भतू सिद्धान्त लिखिए ।
See Answer →प्रमुख उपनिषदों का परिचय कीजिए ।
See Answer →शीत ऋतु के अनुसार पथ्य और अपथ्य लिखिए ।
See Answer →स्वस्थ रात्रिचर्या के लिए क्या आहार-विहार हाने चाहिए ?
See Answer →आयुर्वेद के अवतरण पर लेख लिखिए ।
See Answer →'स्तोः शूना शुः' का सविस्तार वर्णन व्याख्या।
See Answer →मधुरिः' की रूपसिद्धि प्रक्रिया लिखें।
See Answer →'नमः-स्वस्ति-स्वाहा स्वधाऽलं-वषद्योगाच्छ' सूत्र की सविस्तार व्याख्या।
See Answer →'सुप्तिङन्तं पदम्' सूत्र का सविस्तार वर्णन व्याख्या।
See Answer →आदर्शनं लोपः' सूत्र की सविस्तार व्याख्या।
See Answer →'नदीभिश्च' सूत्र की व्याख्या कीजिये।
See Answer →'राजपुरुषः' पद में कौन सा समास है? स्पष्ट कीजिये।
See Answer →संयोग' संज्ञा को स्पष्ट कीजिये।
See Answer →'सुध्युपास्यः' की रूपसिद्धि प्रक्रिया लिखिए।
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