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कौटिल्य अर्थशास्त्र के अनुसार कल्याणमय राज्यों के प्रारूप पर विस्तृत रूप से लिखें।

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महाकवि कालिदास की रचनाओं के अनुवाद पर लेख लिखिए ।

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उत्तरवैदिक काल के राज्य व्यवस्था का विस्तारपूर्वक वर्णन करें।

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विश्व में महाभरत के प्रचलन को रेखांकित कीजिए ।

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पतन्त्र की कथाओं के अनुवाद पर प्रकाश डालिए ।

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धर्मशास्त्रीय ग्रंथों में प्रतिपादित सामाजिक संस्थानों का प्रकाश डालें।

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श्रीमदभगवद्गीता पर लेख लिखिए ।

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भारतीय समाज पर बौद्ध धर्म, इस्लाम और पाश्चात्य संस्कृति के प्रभावों का विस्तारपूर्वक वर्णन करें।

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फारसी भाषा में उपनिषदों के अनुवाद पर लेख लिखिए ।

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गीता की दार्शनिक देन पर लेख लिखिए ।

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संस्कृत अध्ययन केन्द्र के रूप में एशिया पर लेख लिखिए ।

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संस्कृत अध्ययन केन्द्र के रूप में अमेरिका पर लेख लिखिए ।

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विश्वपटल पर संस्कृत भाषा के महत्व को रेखांकित कीजिए ।

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विश्व की भाषाओं में संस्कृत शब्दों के स्थान पर लेख लिखिए ।

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विश्व में संस्कृत भाषा के प्रभाव को उदाहरण द्वारा समझाएं ।

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पूर्व और पश्चिम देशों पर वैदिक संस्कृति के प्रभाव को स्पष्ट कीजिए ।

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गीता में स्थितधी की प्रशंसा

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निम्नलिखित गद्यांशों का अंग्रेजी में अनुवाद कीजिए :

क) वीरवर अमरसिंह मारवाड़ के राठौड़ राजा गजसिंह के ज्येष्ठ पुत्र थे। इनके समय में राजस्थान के प्रायः सभी राजपूत नरेश प्रतापी मुगल सम्राट शाहजहाँ के अधीन हो चुके थे। नियमानुसार प्रत्येक राजपूत नरेश को स्वयं अथवा अपने पुत्र को शाही दरबार में उपस्थित रखना पड़ता था। वहाँ वे अपनी वीरता और पराक्रम के बल पर उन्नति करते थे।

अमरसिंह राठौड़ भी शाहजहाँ के दरबार में किसी उच्च पद पर नियुक्त थे; किंतु इस कारण के अतिरिक्त दूसरा मुख्य कारण और भी था। अमरसिंह के बचपन से ही तेजस्वी और उदंड होने के कारण मारवाड़ के सभी सामंत सरदार अमरसिंह से रुष्ट रहने लगे, यहाँ तक कि उनके पिता गजसिंह भी उनसे अप्रसन्न रहते थे। मारवाड़-नरेश के ज्येष्ठ पुत्र होने के कारण अमरसिंह राज्य-सिंहासन के वास्तविक उत्तराधिकारी थे, किंतु गजसिंह ने उनका राज्याधिकार से च्युत कर अपने छोटे पुत्र यशवंतसिंह को युवराज बना दिया था। मारवाड़ सिंहासन से कुछ संबंध न रहने के कारण अमरसिंह शाही दरबार में ही रहा करते थे। दरबार में उन्होंने अच्छी ख्याति प्राप्त की थी और बादशाह ने भी प्रसन्न होकर 'तीन हजारी' का मनसब और 'राव' की उपाधि देकर नागौर का इलाका उनके अधीन कर दिया था।

पैतृक राज्याधिकार से वंचित किए जाने पर भी अमरसिंह ने अपने बाहुबल से यह सम्मान प्राप्त किया था; किंतु जिस उदंड स्वभाव के कारण उनको स्वदेश और युवराज पद तक से वंचित रहना पड़ा, उसने यहाँ भी उनका पीछा न छोड़ा, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें अकाल में ही इस संसार को छोड़ना पड़ा।

ख) दो गोल से पिछड़ने के बावजूद शनिवार को भारतीय हॉकी टीम ने न्यूजीलैंड को 3-2 से हराकर राष्ट्रमंडल खेलों के फाइनल में प्रवेश किया। रविवार को फाइनल में भारत का मुकाबला मौजूदा चैम्पियन ऑस्ट्रेलिया से होगा, जो 2010 राष्ट्रमंडल खेलों फाइनल की पुनरावृत्ति होगी। एक अन्य सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड को 4-1 से हराया।

नियमित कप्तान सरकार सिंह के बिना खेल रहे भारत के लिए कार्यवाहक कप्तान रुपिन्दर पाल सिंह, रमनदीप सिंह और आकाशदीप सिंह ने गोल दाग कर टीम के लिए कम से कम रजत पदक पक्का कर दिया। किवी टीम ने दूसरे मिनट में साइमन चाइल्ड के गोल की बदौलत 1-0 की बढ़त हासिल कर ली थी। दसवें मिनट में कीवी टीम को पेनाल्टी कॉर्नर मिला, लेकिन वह इसे गोल में तब्दील नहीं कर सके। हालाँकि 18वें मिनट में मिले पेनाल्टी कॉर्नर में न्यूजीलैंड ने कोई गलती नहीं की और निक हेग ने गेंद गोल पोस्ट में डाल कीवी टीम को 2-0 की बढ़त दिला दी। 27वें मिनट में भारत को एकमात्र पेनाल्टी कॉर्नर मिला और ड्रेग फ्लिकर वी. रघुनाथ ने गेंद को नेट में डाला, रुपिन्दर ने गोल कर भारत को पहली सफलता दिलाई।

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काम पर नियंत्रण

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शारीरिक और मानसिक अनुशासन

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