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Patriarchy in kinship

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 Examine gender in anthropological studies.

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 Discuss feminist psychoanalytical theories of gender.

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Discuss the status of women in tribal societies.

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Provide a discussion on the concept of gender and differences between gender and sex.

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सब मिलकर रोओ भरत भाई। 

हा ! हा! भारत दुर्दशा न देखी जाई ।।

सबके पहिले जेहि ईश्वर धन बल दीनो।

सबके पहिले जेहि सभ्य विधाता कीनो।।

सबके पहिले जो रूप रंग रस भीनो।

सबके पहिले विद्याफल जिन गहि लीनो ।।

अब सबके पीछे सोई परत लखाई।

हा ! हा ! भारत दुर्दशा न देखी जाई।।

 

दुःख की पिछली रजनी बीच 

विकसता सुख का नवल प्रभात;

एक परदा यह झीना नील छिपाये है जिसमें सुख गात।

जिसे तुम समझे हो अभिशाप,

जगत की ज्वालाओं का मूल,

ईश का वह रहस्य वरदान

कभी मत इसको जाओ भूल;

 

हमारे निज सुख, दुख निःश्वास 

तुम्हें केवल परिहास,

तुम्हारी ही विधि पर विश्वास

हमारा चिार आश्वास

आये अनंत द्वत्कंप ! तुम्हारा अविरत स्पंदन

सृष्टि शिराओं में सञ्चारित करता जीवन;

खोल जगत के शत शत नक्षत्रों से लोचन

भेदन करते अहंकार तुम जग का क्षण-क्षण

सत्य तुम्हारी राज यष्टि, सम्मुख नट त्रिभुवन,

भूप अकिंचन,

अटल शास्ति नित करते पालन !

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ठकुरी बाबा की चारित्रिक विशेषताएँ

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धोखा' निबंध का प्रतिपाद्य

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साक्षात्कार और 'ऑक्टेवियो पॉज'

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तांबे के कीडे की प्रतीक योजना

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दम्य जीवन' की विषयवस्तु के प्रति लेखकीय दृष्टिकोण का सोदाहरण विश्लेषण कीजिए।

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हिन्दी जीवनी साहित्य में 'कलम का सिपाही' एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।" इस कथन की समीक्षा कीजिए

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लोभ और प्रीति निबंध के भावों का विवेचन करते हुए शुक्लजी की मनोभाव संबंधी अवधारणाओं पर अपना मत प्रस्तुत कीजिए। 

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'अंधायुग' के चरित्रों की प्रतीकात्मकता का उल्लेख करते हुए नाटक में वर्णित मूल्य संघर्ष की प्रासंगिकता बताइए। 

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यह आत्महत्या होगी प्रतिध्वनि इस पूरी संस्कृति में दर्शन में, धर्म में, कलाओं में शासन-व्यवस्था में आत्मघात होगा बस अंतिम लक्ष्य मानव का

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लोहा बड़ा कठोर होता है। कभी-कभी वह लोहे को भी काट डालता है। उहूँ भाई! मैं तो मिट्टी हूँ- मिट्टी जिसमें से सब निकलते हैं। मेरी समझ में तो मेरे शरीर की धातु मिट्टी है, जो किसी के लोभ की सामग्री नहीं, और वास्तव में उसी के लिए सब धातु अस्त्र बनकर चलते हैं, लड़ते हैं, जलते हैं, टूटते हैं, फिर मिट्टी हो जाते हैं। इसलिए मुझे मिट्टी समझो धूल समझो।

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कई-कई दिनों के लिए अपने को उससे काट लेती हूँ। पर धीरे-धीरे हर चीज फिर उसी ढर्रे पर लौट आती है। सब-कुछ फिर उसी तरह होने लगता है जब तक कि हम जब तक कि हम नए सिरे से उसी खोह में नहीं पहुँच जाते। मैं यहाँ आती हूँ.... यहाँ आती हूँ तो सिर्फ इसीलिए कि

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चूरन सभी महाजन खाते। जिससे जमा हजम कर जाते ।। चूरन खाते लाला लोग। जिसकी अकिल अजीरन रोग।। चूरन खावैं एडिटर जात। जिनके पेट पचै नहिं बात ।। चूरन साहेब लोग जो खाता। सारा हिंद हजम कर जाता।। चूरन पुलिस वाले खाते। सब कानून हजम कर जाते ।।

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 Victor Turners work

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Traditional Remedies

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