रूपक
See Answer →नायिका भेद
See Answer →निम्नलिखित में से किन्हीं दो का चरित्र-चित्रण कीजिए।
(क) वासवदत्ता
(ख) चारुदत्त
(ग) यक्ष
(घ) शाकार
See Answer →काव्य की परिभाषा देते हुए काव्य प्रयोजन का विस्तारपूर्वक वर्णन करें।
See Answer →रस-निरूपण पर प्रकाश डालें।
See Answer →कथासाहित्य का उद्भव कैसे हुआ ? विस्तारपूर्वक प्रकाश डालें।
See Answer →अधोलिखित में से किन्हीं तीन की ससन्दर्भ व्याख्या कीजिए :-
(क) तस्य स्थित्वा कथमपि पुरः कौतुकाधानहेतो।
रन्तर्बाष्पश्चिरमनुचरो राजराजस्य दध्यौ ।।
मेघालोके भवति सुखिनोऽप्यन्यथावृत्ति चेतः ।
कण्ठाश्लेषप्रणयिनि जने किं पुनर्दूरसंस्थे ।।
(ख) छन्नोपान्तः परिणतफलद्योतिभिः काननाम्रै।
स्त्वय्यारूढे शिखरमचलः स्निग्धवेणीसवर्णे ।।
नूनं यास्यत्यमरमिथुनप्रेक्षणीयामवस्थां ।
मध्ये श्यामः स्तन इव भुवः शेषविस्तारपाण्डुः ।।
(ग) प्रद्योतस्य प्रियदुहितरं वत्सराजोऽत्र जहे।
हैमं तालद्रुमवनमभूदत्र तस्यैव राज्ञः ।।
अत्रोद्घान्तः किल नलगिरिः स्तम्भमुत्पाट्य दर्पा।
दित्यागान्तून् रमयति जनो यत्र बन्धूनभिज्ञः ।।
(घ) श्यामास्वङ्ग, चकितहरिणीप्रेक्षणे दृष्टिपातं ।
वक्त्रच्छायां शशिनि, शिखिनां बर्हभारेषु केशान् ।।
उत्पश्यामि प्रतनुषु नदीवीचिषु भ्रूविलासान्।
हन्तैकस्मिन्क्वचिदपि न ते चण्डि ! सादृश्यमस्ति ।।
(च) यत्रोन्मत्तभ्रमरमुखराः पादपा नित्यपुष्पा।
हंसश्रेणीरचितशना नित्यपद्मा नलिन्यः ।।
केकोत्कण्ठा भवनशिखिनो नित्यभास्वत्कलापा।
नित्यज्योत्स्नाः प्रतिहततमोवृत्तिरम्याः प्रदोषाः
See Answer →व्यवकलित को उदाहरण सहित लिखिए
See Answer →जैनकालीन गणित
See Answer →तीन का नियम
See Answer →लगध ज्योतिष का महत्व
See Answer →वैदिक गणित में प्रयुक्त तकनीकी शब्दों का वर्णन कीजिए ।
See Answer →संख्यास्थानानि और संख्यासारणि प्रणाली के विदेशों में प्रसार पर लेख लिखिए ।
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