भारतीय संस्कृति में मानव जीवन के उद्देश्य के रूप में चार पुरुषार्थों का वर्णन कीजिए ।
See Answer →दलित पँथर आंदोलन और दलित साहित्य में अतःसंबंध को समझाइये।
See Answer →अक्का महादेवी
See Answer →नाथ साहित्य
See Answer →संवाद लोकतान्त्रिक परम्परा
See Answer →अश्वघोषः
See Answer →कन्नड भक्तिसाहित्यस्य परम्परायाः परिचयं दत्त्वा वाचनसाहित्यस्य लक्षणं व्याख्यातव्यम्।
See Answer →नाथसाहित्यस्य ऐतिहासिकदृष्टिकोणं व्याख्यातव्यम्।
See Answer →लोकयत दर्शनस्य चर्चां कुरुत।
See Answer →दिङ्गनागस्य दर्शनस्य विस्तरेण चर्चां कुरुत।
See Answer →कनकं माया, कनकं न माया, नारी माया, नारी न माया, मृत्तिका माया, मृत्तिका न माया, मनसः आशा माया। भो! गुहेश्वर
See Answer →धधा म थकुनु महि वाह सने, जहि हित ह म पारीन लूजलुलु रत बोव-हथ, क िन क िन क िन निवह ् बान ननस े ु े वा ि ि ि िु ि, िे ु ु र आनुहु भे। निमल चित्त - सहचरता, करिष्यामि निःसंकोचम्।
See Answer →'न च' अस्य दुःख सम्भिन्नतया पुरुषार्थत्वमेव नास्ति इति मन्तव्यम् अवर्जनीयता प्राप्तस्य दुःखस्य परिहारेण सुखमात्रस्यैव भोक्तव्यत्वात । तद्यथा-मत्सयार्थी सशल्कान् सकटकान् मत्स्यानुपादत्ते स यावदादेय तावदादाय निवर्तते । यथा वा धान्यार्थी सपलालानि धान्यानि आहरति, स याददादेय तावदादाय निवर्तते। तस्माद् दुःखमयात् नानुकूलवेदनीयं सुखं त्यक्तुमचितम ।।
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