What was the Civil Rights Movement in the USA? What are the views of Democratic and Republicans regrading this?
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Enumerate the major efforts of Greenpeace in Europe, especially in the Anti-nuclear campaigns.
See Answer →In what ways do dam construction alter the ecological balance? Elaborate with appropriate examples.
See Answer →What are the dynamics of Non-Violent Movements? What kind of outcomes do they generate?
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Examine the Prohibition Movement and its impact, especially in the Indian scenario.
See Answer →अदम्य जीवन : मूल संवेदना
See Answer →लोभ और प्रीति' की विशेषताएँ
See Answer →ताँबे के कीड़े' की कथावस्तु
See Answer →कलम का सिपाही' जीवनी के शिल्पगत वैशिष्ट्य पर प्रकाश डालिए।
See Answer →अंधायुग' अंधों के बहाने ज्योति की कथा है।" इस कथन की समीक्षा कीजिए।
See Answer →जयशंकर प्रसाद के नाटक और रंगमंच संबंधी निबंधों के आधार पर उनकी नाट्य दृष्टि पर विचार कीजिए।
See Answer →सामाजिक यथार्थ के परिप्रेक्ष्य में 'अंधेर नगरी' नाटक की समीक्षा कीजिए।
See Answer →निम्नलिखित अवतरणों की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए।
(क). संस्कृति थी यह एक बूढ़े और अंधे की जिसकी संतानों ने महायुद्ध घोषित किए, जिसके अंधेपन में मर्यादा गलित अंग वेश्या-सी प्रजाजनों को भी रोगी बनाती फिरी उस अंधी संस्कृति, उस रोगी मर्यादा की रक्षा हम करते रहे सत्रह दिन।
(ख). कविता करना अनंत पुण्य का फल है। इस दुराशा और अनंत उत्कंठा से कवि-जीवन व्यतीत करने की इच्छा हुई। संसार के समस्त अभावों को असंतोष कहकर हृदय को धोखा देता रहा। परंतु कैसी विडंबना ! लक्ष्मी के लालों का भ्रू-भंग और क्षोभ की ज्वाला के अतिरिक्त मिला क्या! एक काल्पनिक प्रशंसनीय जीवन, जो दूसरों की दया में अपना अस्तित्व रखता है! संचित हृदय कोश के अमूल्य रत्नों की उदारता और दारिद्रय का व्यंग्यात्मक कठोर अट्टहास, दोनों की विषमता की कौन-सी व्यवस्था होगी।
(सी)। चना तौकी, मैना खायें।
बोलें अच्छा बना चबैना।। चना खायें गफूरन, मुन्नी। बोलें और नहीं कुछ सुन्ना ।। चना खाते सब बंगाली। जिनकी धोती ढीली-ढाली ।। चना खाते मियाँ जुलाहे। डाढ़ी हिलती गाह बगाहे ।। चना हाकिम सब जो खाते। सब पर दूना टिकस लगाते ।।
चने जोर गरम-टके सेर।
(घ). ऐसा जीवन तो विडंबना है, जिसके लिए रात-दिन लड़ना पड़े। आकाश में जब शीतल शुभ्र शरद-शशि का विलास हो, तब भी दांत-पर-दांत रखे मुट्ठियों को बांधे लाल आंखों से एक-दूसरे को घूरा करें! बसंत के मनोहर प्रभात में, निभृत कगारों में चुपचाप बहने वाली सरिताओं का स्रोत गरम रक्त बहाकर लाल कर दिया जाय ! नहीं-नहीं, चक्र ! मेरी समझ में मानव जीवन का यही उद्देश्य नहीं है। कोई और भी निगूढ़ रहस्य है चाहे मैं स्वयं उसे न जान सका हूँ।
See Answer →Threats to ozone layer.
See Answer →Climate justice.
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