जाग तुझको दूर जाना
जाग तुझको दूर जाना
चिर सजग आँखे उनींदी आज कैसा व्यस्त बाना !
जाग तुझको दूर जाना!
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जाग तुझको दूर जाना
चिर सजग आँखे उनींदी आज कैसा व्यस्त बाना !
जाग तुझको दूर जाना!
See Answer →छोड़ दुमों की मृदु छाया,
तोड़ प्रकृति से भी माया,
बाले! तेरे बाल जाल में कैसे उलझा दूँ लोचन?
भूल अभी से इस जग को !
See Answer →दिवसावसान का समय
मेघमय आसमान से उतर रही है
वह संध्या- सुंदरी परी-सी
धीरे धीरे धीरे,
तिमिरांचल में चंचलता का नहीं कहीं आभास,
मधुर-मधुर हैं दोनों उसके अधर -
किंतु गंभीर नहीं है उनमें हास-विलास ।
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मेघमय आसमान से उतर रही है
वह संध्या- सुंदरी परी-सी
धीरे धीरे धीरे,
तिमिरांचल में चंचलता का नहीं कहीं आभास,
मधुर-मधुर हैं दोनों उसके अधर -
किंतु गंभीर नहीं है उनमें हास-विलास ।
See Answer →मनन करावेगी तू कितना ? उस निश्चिंत जाति का जीव,
अमर मरेगा क्या? तू कितनी गहरी डाल रही है नींव ।
आह घिरेगी हृदय लहलहे खेतों पर करका-घन-सी,
छिपी रहेगी अंतरतम में, सब के तू निगूढ़ धन सी ।
See Answer →अश्वघोष
See Answer →मिलिन्द और नागसेन
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See Answer →नाथ साहित्य
See Answer →शरण साहित्य
See Answer →वचन साहित्य की विशेषताओं को बताइए।
See Answer →'चावार्क दर्शन' आदर्शवादी दार्शनिक सिद्धान्तों को प्रखर प्रतिपक्ष के रूप में चुनौती देता है, कैसे? चर्चा कीजिए।
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