Why have the tribals been ignored by the mainstream society? Explain.
See Answer →Discuss the Chakma tribes found in Mizoram.
See Answer →What are the concerns confronting the tribal society in Manipur.
See Answer →Why are the victims of displacement and forced migration often the marginalized
sections of the society?
List the tribes of Arunachal Pradesh. Describe any one of the tribes.
See Answer →निम्नलिखित पर लगभग 250 शब्दों में संक्षिप्त टिप्पणियाँ लिखिए।
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ऐसा एक विषय चिन्हित एवं चयनित कीजिए जो ग्राम जीवन से संबंधित हो। अपने अध्ययन के महत्व, अध्ययन की इकाई, विधियों, उपकरणों तथा प्रविधियों पर बल देते हुए एक सिनॉप्सिस तैयार करने के चरण लिखिए।
See Answer →'त्यागपत्र' की भाषा
See Answer →मुंशी तोताराम का चरित्र
See Answer →आपका बंटी' के आधार पर शकुन की चारित्रिक विशेषताएँ बताइए।
See Answer →जैनेन्द्र के उपन्यासों का परिचय दीजिए।
See Answer →मृगनयनी' का प्रतिपाद्य स्पष्ट कीजिए।
See Answer →मरने के समय वह सिर स्थिर था, शांत था, अडिग और निर्भय। वह सब में रम रहा है, मेरे और जल्लाद के भीतर वही है, जल्लाद की तलवार और मेरे सिर में भी वही है। सब में वही है। सब बराबर हैं। साक्षी और अटल मैं वही है। दोनों में वही है ? फिर मैंने उन दोनों के बीच में भेद क्यों किया ? पर वह तो वर्णाश्रम की बात थी। जो कुछ भी हो, अब किसी के लिए मन में कोई बुराई नहीं। सिकन्दर के लिए नहीं, मौखरिओं के लिए नहीं, किसी के लिए नहीं।
See Answer →सीताराम की गुहार बाबा के कानों में तो ऐसे पड़ी जैसे कोई अंधा बंद गली में चलते-चलते दीवार से टकराकर अपना सिर फुड़ौवल कर ले। मन को पछतावा हुआ, 'हे प्रभु, तुम्हारी यह माया ऐसी है कि जन्म भर जप-तप साधन करते-करते पण मरो तब भी इससे पार पाना उस समय तक महा कठिन है जब तक कि तुम्हारी ही पूर्ण कृपा न हो। सुनता हूँ, विचारता हूँ, समझता भी हूँ, यहाँ तक कि अब तो दूसरों को विस्तार से समझा भी देता हूँ पर मौके पर यह सारा किया-धरा-चौपट हो जाता है।
See Answer →बहुत कुछ जो इस दुनिया में हो रहा है वह ऐसा ही क्यों होता है, अन्यथा क्यों नहीं होता—इसका क्या उत्तर है? उत्तर हो अथवा न हो, पर जान पड़ता है भवितव्य ही होता है। नियति का लेख बैठा है। एक भी अक्षर उसका यहाँ से वहाँ न हो सकेगा। वह बदलता नहीं, बदलेगा नहीं। पर विधि का वह अतर्क्य लेख किस खयाल में बनाया है, उसका उसमें क्या प्रयोजन है— यह भी कभी पूछकर जानने की इच्छा की जा सकती है, या नहीं? शायद नहीं। ज्ञानी जन कह गये हैं कि परम कल्याणमय ही इस सृष्टि में अपनी परम लीला का विस्तार कर रहा है। मैं मान लेता हूँ कि ऐसा ही है। न मानूँ तो जीऊँ कैसे?
See Answer →जीवन-रंगशाला का यह निर्दयी सूत्रधार किसी अगम गुप्त स्थान पर बैठा हुआ अपनी जटिल भ्रू क्रीड़ा दिखा रहा है। यह कौन जानता था कि कल अकाल होने जा रही है, अभिनव सत्य का रूप ग्रहण करने वाला है। शिखा ने इन्दु को परास्त करके अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया था। उसकी वैज्ञानिक सेना ने प्रकृति पर आतंक जमा रखा था। सद्वृत्तियाँ मुँह छिपाये पड़ी थीं और कुवृत्तियाँ विजय-गर्व से इतलाती फिरती थीं।
See Answer →क्या नृजातीयता सामाजिक रूप से निर्मित है? चर्चा कीजिए।
See Answer →वैधता के आधारों पर चर्चा कीजिए।
See Answer →शक्ति क्या है? शक्ति के साधनों की चर्चा कीजिए।
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