कैलेण्डर सुधार समिति के गठन का उद्देश्य क्या था और इसका भारतीय समाज पर क्या प्रभाव पड़ा?
See Answer →ग्रेगोरियन कैलेण्डर और हिजरी कैलेण्डर में मुख्य अंतर संक्षेप में स्पष्ट कीजिए।
See Answer →‘कैलेण्डर’ शब्द का शाब्दिक और वैज्ञानिक अर्थ क्या है?
See Answer →लू-पंचांग किस प्रकार का कैलेण्डर है और इसका उपयोग कहाँ होता है?
See Answer →भारतीय पंचांग में चान्द्र-सौर समन्वय क्यों आवश्यक है?
See Answer →विश्व के प्रमुख कैलेण्डरों (जैसे माया, चीन, मिश्र, ग्रीक) का उद्भव और विकास स्पष्ट कीजिए और विश्लेषण कीजिए कि इनमें भारतीय कालगणना का क्या प्रभाव रहा।
See Answer →सूर्यसिद्धांत, सिद्धांत शिरोमणि और आर्यभटीयम् में प्रस्तुत कालगणना की पद्धतियों की तुलना कीजिए। यह स्पष्ट कीजिए कि इन ग्रंथों में खगोलीय अवलोकनों और गणित का क्या योगदान है।
See Answer →रोमन से ग्रेगोरियन कैलेण्डर तक की विकास-यात्रा को उदाहरण बनाकर समझाइए कि कैलेण्डर सुधार इतिहास में एक वैज्ञानिक अनिवार्यता कैसे बनता है।
See Answer →कैलेण्डर समिति और शक संवत् के सन्दर्भ में यह स्पष्ट कीजिए कि आधुनिक भारत में कैलेण्डर सुधार की आवश्यकता क्यों पड़ी और इसके पीछे कौन से वैज्ञानिक व राष्ट्रीय उद्देश्य थे।
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भारतीय नववर्ष परम्पराओं की विविधता का अध्ययन करते हुए स्पष्ट करें कि विभिन्न क्षेत्रों में भिन्न नववर्ष होने के बावजूद कालगणना की मूल संरचना एक कैसे है।
See Answer →भारतीय पंचांग परम्परा को 'कैलेण्डर' न मानकर 'काल-विज्ञान की प्रणाली' के रूप में सिद्ध कीजिए। नवविध कालमान और वर्ष-समन्वय के आधार पर विवेचन कीजिए।
See Answer →मुण्डक उपनिषद् में वर्णित 'द्वा सुपर्णा सयुजा सखाया' रूपक की दार्शनिक व्याख्या करते हुए जीव, आत्मा और परमात्मा के सम्बन्ध का समीक्षात्मक विश्लेषण कीजिए ।
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मुण्डक उपनिषद् में प्रतिपादित 'परा विद्या' और 'अपरा विद्या' के सिद्धान्त का आलोचनात्मक विवेचन कीजिए ।
See Answer →नायमात्मा प्रवचनेन लभ्यो न मेधया न बहुना श्रुतेन।
यमेवैष वृणुते तेन लभ्यस्तस्यैष आत्मा विवृणुते तनूं स्वाम् ॥
See Answer →यत् तदद्रेश्यमग्राह्यमगोत्रमवर्णमचक्षुःश्रोत्रं तदपाणिपादम्।
नित्यं विभुं सर्वगतं सुसूक्ष्मं तदव्ययं यद् भूतयोनिं परिपश्यन्ति धीराः ॥ ॥
See Answer →तदेतत् सत्यं मन्त्रेषु कर्माणि कवयो यान्यपश्यंस्तानि त्रेतायां बहुधा संततानि।
तान्याचरथ नियतं सत्यकामा एष वः पन्थाः सुकृतस्य लोके ॥
See Answer →शिवसंकल्प सूक्त में वर्णित 'मन' की अवधारणा का मनोवैज्ञानिक एवं दार्शनिक विश्लेषण कीजिए तथा भारतीय चिंतन-परंपरा में मन-नियंत्रण की भूमिका पर समीक्षात्मक टिप्पणी कीजिए।
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हिरण्यगर्भ सूक्त को सृष्टि-दर्शन का आधार-ग्रंथ मानते हुए, उसमें प्रतिपादित ईश्वर-तत्त्व की अवधारणा का आलोचनात्मक अध्ययन कीजिए तथा उपनिषदिक ब्रह्म-चिन्तन से उसकी तुलना कीजिए।
See Answer →ऋग्वैदिक परंपरा में अग्नि देवता के स्वरूप का दार्शनिक एवं प्रतीकात्मक विश्लेषण कीजिए।
See Answer →पद-पाठ
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