भरतवाक्य
See Answer →अभिज्ञानशाकुन्तलम्’ के चतुर्थ अंक के वैशिष्ट्य पर प्रकाश डालिए।
See Answer →उपमा कालिदासस्य’ इसको स्पष्ट कीजिए।
See Answer →भास के व्यक्तित्व, कर्तृत्व एवं शैलीगत वैशिष्ट्य पर प्रकाश डालिए।
See Answer →अनुचरति शशाङ्क राहुदोषेऽपि तारा” इस सूक्ति को स्पष्ट कीजिए।
See Answer →‘प्रतिमानाटक’ के तृतीय अङ्क की कथावस्तु संक्षेप में लिखिए।
See Answer →सूत्रधार क्या है? लक्षण सहित स्पष्ट कीजिए।
See Answer →‘वीथी’ रूपक को लक्षण सहित स्पष्ट कीजिए।
See Answer →संवाद सूक्तों से नाट्योत्पत्ति के सिद्धान्त’ को स्पष्ट कीजिए।
See Answer →अधोलिखित पद्यांशों की ससन्दर्भ व्याख्या कीजिए: -
(अ) कर्णौ त्वरापहृतभूषणभुग्नपाशौ
संस्त्रंसिताभरणगौरतलौ च हस्तौ ।
एतानि चाभरणभारनतानि गात्रे
स्थानानि नैव समतामुपयान्ति तावत ॥
अथवा
अयशसि यदि लोभ: कीर्तयित्वा किमस्मान्
किमु नृपफलतर्ष: किं नरेन्द्रो न दद्यात् ।
अथ तु नृपतिमातेत्येष शब्दस्तवेष्टो
वदतु भवति ! सत्यं किं तवार्यो न पुत्र: ?
(ब) शुश्रूषस्व गुरून् कुरु प्रियसखीवृत्तिं सपत्नीजने
भर्तुर्विप्रकृताऽपि रोषणतया मा स्म प्रतीपं गम: ।
भूयिष्ठं भव दक्षिणा परिजने भाग्येष्वनुत्सेकिनी
यान्त्येवं गृहिणीपदं युवतयो वामा: कुलस्याधय: ।।
अथवा
सङ्कल्पितं प्रथममेव मया तवार्थे
भर्तारमात्मसदृशं सुकृतैर्गता त्वम् ।
चूतेन संश्रितवती नवमालिकेय-
मस्यामहं त्वयि च सम्प्रति वीतचिन्तः ॥
बाधित हेत्वाभास
See Answer →द्वैतवाद
See Answer →अभाव
See Answer →कर्म
See Answer →सामान्य
See Answer →पदार्थ के त्रिविध धर्म
See Answer →मीमांसा एवं वेदान्त दर्शन का परिचय दीजिए।
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न्याय-वैशेषिक दर्शन के अनुसार गुण का लक्षण बताते हुए गुणों के प्रकारों का वर्णन कीजिए।
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