वास्तु-प्रयोजन
See Answer →मर्मस्थान
See Answer →त्रिशालवास्तु
See Answer →राहु मुख पुच्छ विचार
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शकुन के द्वारा भूमि में शल्य का ज्ञान किस प्रकार किया जाता है? स्पष्ट कीजिए ।
See Answer →भूमि-परीक्षण की किन्हीं दो विधियों का उल्लेख कीजिए ।
See Answer →अधोलिखित श्लोकों में से किन्ही तीन श्लोकों की ससन्दर्भ व्याख्या कीजिए: - 15X3=45
(1) परगेहकृताः सर्वाः श्रौतस्मार्तक्रियाः शुभाः ।
निष्फलाः स्युर्यतस्तासां भूमीशः फलमश्नुते ॥
(2) जलान्तं प्रस्तरान्तं वा पुरुषान्तमथापि वा ।
क्षेत्रं संशोध्य वोद्धृत्य शल्यं सदनमारभेत् ॥
(3) मूलद्वारं नान्यैर्द्वारैरभिसन्दधीत रूपद्वर्य्या ।
घट-फल-पत्र-प्रथमादिभिश्च तन्मङ्गलैश्चिनुयात् ॥
(4) नन्द्यावर्तमलिन्दैः शालाकुड्यात् प्रदक्षिणान्तगतैः ।
द्वारं पश्चिममस्मिन् विहाय शेषाणि कार्याणि ॥
See Answer →माया
See Answer →शब्द प्रमाण
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See Answer →परार्थानुमान
See Answer →अनात्मवाद
See Answer →अधिकारी
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भारतीय दर्शन परम्परा की दृष्टि में यथार्थवाद क्या है? इसे विस्तार से समझाइए ।
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