Solve your IGNOU Doubts
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Question:

स्वाधीनता संग्राम के संदर्भ में राष्ट्रीय चेतना के विकास को रेखांकित कीजिए |

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Question:

1. उनके अलौकिक दर्शनों से दूर होता पाप था
अति पुण्य मिलता था तथा मिटता हृदय का ताप था।
उपदेश उनके शान्तिकारक थे निवारक शौक के
सब लोक उनका भक्त था, वे थे हितैषी लोक के ।।

2. चाह नहीं, मैं सुरबाला के गहनों में गूँथा जाऊँ।
चाह नहीं, प्रेमी-माला में बिंध प्यारी को ललचाऊँ ॥

चाह नहीं, सम्राटों के शव पर, हे हरि, डाला जाऊँ।
चाह नहीं, देवों के सिर पर चढ़ूँ, भाग्य पर इठलाऊँ ।।

मुझे तोड़ लेना वनमाली |
उस पथ पर देना तुम फेंक ।।
मातृ-भूमि पर शीश चढ़ाने।
जिस पथ पर जावें वीर अनेक।। 

3. उदित हुआ सौभाग्य, मुदित महलों में उजियारी छाई
किंतु कालगति चुपके-चुपके काली घटा घेर लाई
तीर चलाने वाले कर में उसे चूड़ियाँ कब भाई
रानी विधवा हुई, हाय! विधि को भी नहीं दया आई।
निसंतान मरे राजाजी रानी शोक-समानी थी
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

4. आज मुक्ति के अरमानों ने
मिलकर यों ललकारा है
ओ सब सोनेवालो, जागो
गूँज रहा नक्कारा है!
कैसी रात? कहाँ के सपने
यह नव प्रभात पधारा है!
ऐसे हँसते-से प्रभात का
तुम करने सम्मान, उठो
उठो, उठो ओ नंगों भूखें
ओ मजदूर किसान उठो।
 

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Question:

'हल्दी घाटी' के पठित अंश का महत्व बताइए |

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Question:

'हिमालय' शीर्षक कविता में अभिव्यक्त राष्ट्रीय चेतना को रेखांकित कीजिए।

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Question:

'विप्लव गायन' कविता का प्रतिपाद्य स्पष्ट कीजिए |

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Question:

सुभद्रा कुमारी चौहान का साहित्यिक परिचय दीजिए |

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मैथिलीशरण गुप्त के काव्य में निहित नारी सम्मान की भावना को रेखांकित कीजिए।

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Question:

राष्ट्रीयता के विकास में भारतीय कविता के योगदान पर प्रकाश डालिए।

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Question:

आधुनिक भारतीय साहित्य की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए नवजागरण की विशेषताओं की चर्चा कीजिए।

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स्वाधीनता संग्राम के संदर्भ में राष्ट्रीय चेतना के विकास को रेखांकित कीजिए |

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Question:

1. उनके अलौकिक दर्शनों से दूर होता पाप था
अति पुण्य मिलता था तथा मिटता हृदय का ताप था।
उपदेश उनके शान्तिकारक थे निवारक शौक के
सब लोक उनका भक्त था, वे थे हितैषी लोक के ।।

2. चाह नहीं, मैं सुरबाला के गहनों में गूँथा जाऊँ।
चाह नहीं, प्रेमी-माला में बिंध प्यारी को ललचाऊँ ॥

चाह नहीं, सम्राटों के शव पर, हे हरि, डाला जाऊँ।
चाह नहीं, देवों के सिर पर चढ़ूँ, भाग्य पर इठलाऊँ ।।

मुझे तोड़ लेना वनमाली |
उस पथ पर देना तुम फेंक ।।
मातृ-भूमि पर शीश चढ़ाने।
जिस पथ पर जावें वीर अनेक।। 

3. उदित हुआ सौभाग्य, मुदित महलों में उजियारी छाई
किंतु कालगति चुपके-चुपके काली घटा घेर लाई
तीर चलाने वाले कर में उसे चूड़ियाँ कब भाई
रानी विधवा हुई, हाय! विधि को भी नहीं दया आई।
निसंतान मरे राजाजी रानी शोक-समानी थी
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

4. आज मुक्ति के अरमानों ने
मिलकर यों ललकारा है
ओ सब सोनेवालो, जागो
गूँज रहा नक्कारा है!
कैसी रात? कहाँ के सपने
यह नव प्रभात पधारा है!
ऐसे हँसते-से प्रभात का
तुम करने सम्मान, उठो
उठो, उठो ओ नंगों भूखें
ओ मजदूर किसान उठो।

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श्रवण कौशल क्या है? समझाइये।

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 मौखिक संप्रेषण के मानसिक पक्ष को रेखांकित कीजिए |
 

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अर्द्ध स्वरों का परिचय दीजिए।

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Question:

वाचन कौशल से आप क्‍या समझती /समझते हैं?

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Question:

देवनागरी लिपि में वर्ण व्यवस्था पर प्रकाश डालिए।
 

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Question:

 'वचन-विधान' पर प्रकाश डालिए।
 

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Question:

अन्विति से आप क्या समझते »/समझती हैं? सोदाहरण उत्तर दीजिए।
 

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Question:

उच्चारण स्थान के आधार पर वर्णों के भेद पर विचार कीजिए।
 

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Question:

कारक के प्रमुख भेदों पर प्रकाश डालिए |

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