भारतीय ग्रामीण समाज की प्रमुख संस्थाओं का वर्णन कीजिए।
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See Answer →केदारनाथ अग्रवाल के काव्य की प्रमुख विशेषताएं बताइए।
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See Answer →और यही जगह है, जहां पहुँचकर
पत्थरों की चीख साफ सुनी जा सकती है।
पर सच तो यह है कि यहाँ
या कहीं भी फर्क नहीं पड़ता
तुमने जहां लिखा है 'प्यार'
वहीं लिख दो 'सड़क
फर्क नहीं पड़ता
मेरे युग का मुहाविरा है
फर्क नहीं पड़ता
See Answer →गगन पर दो सितारे: एक तुम हो,
धरा पर दो चरण हैं: एक तुम हो.
'त्रिवेणी दो नदी हैं! एक तुम हो,
हिमालय दो शिखर हैं: एक तुम हो,
रहे साक्षी लहरता सिंधु मेरा,
कि भारत हो धरा का बिंदु मेरा ।
कला के जोड़-सी जग-गुत्थियाँ ये,
हृदय के होड़-सी दृढ वृत्तियों ये,
तिरंगे की तरंगों पर चढ़ाते,
कि शत-शत ज्वार तेरे पास आते।
See Answer →क्षमा, दया, तप, त्याग, मनोबल
सबका लिया सहारा
पर नर-व्याघ्र सुयोधन तुमसे
कहो, कहाँ, कब हारा?
क्षमाशील हो रिपु-समक्ष
तुम हुये विनत जितना ही
दुष्ट कौरवों ने तुमको
कायर समझा उतना ही।
अत्याचार सहन करने का
कुफल यही होता है
पौरुष का आतंक मनुज
कोमल होकर खोता है।
क्षमा शोभती उस भुजंग को
जिसके पास गरल हो
उसको क्या, जो दंतहीन,
विषरहित, विनीत, सरल हो?
See Answer →कई दिनों तक चूल्हा रोया, चक्की रही उदास
कई दिनों तक कानी कुतिया सोई उनके पास
कई दिनों तक लगी भीत पर छिपकलियों की गश्त
कई दिनों तक चूहों की भी हालत रही शिकस्त
दाने आए घर के अंदर कई दिनों के बाद
धुओं उठा आँगन के ऊपर कई दिनों के बाद
चमक उठीं घर भर की आँखें कई दिनों के बाद
कौए ने खुजलाई पाँखें कई दिनों के बाद।
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