भोर का तारा का भाषिक वैशिष्ट्य
See Answer →माधवी का कथ्य
See Answer →नाटक के प्रकार
See Answer →रंगमंच और अभिनेयता की दृष्टि से 'स्कंदगुप्त'
See Answer →रंगमंच और अभिनेयता की दृष्टि से 'स्कंदगुप्त'
See Answer →विष्णु प्रभाकर के साहित्य की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
See Answer →'माधवी नाटक की शिल्पगत विशेषताएँ बताइए।
See Answer →'अंधेर नगरी' नाटक की कथावस्तु का विश्लेषण कीजिए।
See Answer →नाटक के तत्वों पर प्रकाश डालिए।
See Answer →ये हैं प्रोफेसर शशांक का कथातार लिखिए।
See Answer →गिल्लू रेखाचित्र का प्रतिपाद्य बताइए।
See Answer →महाकवि जयशंकर प्रसाद संस्मरण के गाय से प्रसाद जी के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालिए।
See Answer →आग रास्ता नहीं है' के गहत्य पर प्रकाश डालिए।
See Answer →रजिया रेखाचित्र का सारांश लिखिए।
See Answer →करुणा निबंध का प्रतिपाद्या लिखिए।
See Answer →निबंध से क्या आशय है? इसकी विशेषताएँ लिखिए।
See Answer →हृदय के भीतर जलनेवाली बिहानि ने उसे किसी काम का नहीं छोड़ा। हे भगवान, तुम ऐसा कुछ नहीं कर सकते कि सारे गाँव के समान इस बालिका को भी चंद्रमा उतना ही शीतल लगे जितना औरों को लगता है अर्थात् विरहिणी की दारूण-व्यथा अब तब के चित की सामान्य अनुभूति के साथ ताल मिलाकर चलने लगी। पागल का लगना एक का लगना होता है, कपि का लगना सबको लगने लगता है। बात उलट कर कही जाय तो इस प्रकार होगी जिसका लगना सबको लगे यह कपि है, जिसका लगना सिर्फ उसे ही लगे, औरों को नहीं वह पागल। लगने लगने में भी भेद है। जो सबो लगे, वह अथ है, जो एक को ही लगे यह अनर्थ है। अर्थसामाजिक होता है।
See Answer →'मन फिर घूम गया कौशल्या की ओर, लाखों-करोड़ों कोलल्याओं की ओर, लाखों-करोड़ों कीलल्याओं के द्वारा मुखरित एक अनाम-स्वरूप कौशल्या की ओर इन सब के तराम बन में निर्वासित हैं। पर क्या बात है कि मुकुट अभी भी उनके माथे पर बंधा है और उसी के भीगने की इतना चिंता है?
See Answer →मनुष्य के हाथ से ही ईश्वर के दर्शन कराने वाले निकलते हैं। बिना काम बिना मजदूरी, बिना हाथ के कला कौशल के विचार और चिंतन किस काम के। तभी देशों के इतिहालों से सिद्ध है कि निकम्मे पादरियों, मौलवियों, पंडितों और साधुओं का, दान के अन्न पर पला हुआ ईश्वर चिंतन, अंतमें पाप, आलस्य और भ्रष्टाचार में परिवर्तित हो जाता है। जिन देशों में हाथ और मुँह पर मजदूरी की धूल नहीं पड़ने पाती वे वर्म और कला-कौशल में कमी उन्नति नहीं कर सकते। पद्यातन निकम्मे सिद्ध हो चुके हैं।"
See Answer →ईश्वर के प्रति बौद्धिक प्रेम
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