जल संतुलन क्या है? जल बजट की व्याख्या स्वच्छ योजनाबद्ध आरेख के साथ कीजिए तथा इसके विभिन्न घटकों के बारे में लिखिए।
See Answer →विभिन्न प्रकार के रिकॉर्डिंग और गैर-रिकॉर्डिंग वर्षामापी की व्याख्या कीजिए।
See Answer →वर्षा के विभिन्न रूपों की व्याख्या कीजिए। स्वच्छ चित्र के साथ संवहनीय और चक्रवातीय वर्षा के बीच अंतर स्पष्ट कीजिए।
See Answer →निम्नलिखित शब्दन के समानार्थी लिखीं।
क. जांगर
ख. झोंझ
ग. गोइयाँ
घ. गधवेरा
ड़. कुलही
च. करिखा
छ. जेवना
ज. जवार
झ. खलार
See Answer →नीचे लीखल किताबन उअर रचना के सामने सही लेखक के नाव रखिके मिलान करीं
| क. फिरंगिया | (विमलानन्द सरस्वती) |
| ख. कागद के महारी | (रामदेव शुक्ल) |
| ग. मेहरारून के दुर्दशा | (मनारेंजन प्रसाद सिन्हा) |
| घ. सुग्गी | (धरीक्षण मिश्र) |
| ड़. भोजपुरी लोक साहित्य | (राहुल सांकृत्यायन) |
| च. किसान भगवान | (डॉ० कृष्णदेव उपाध्याय) |
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पंच सन्धियाँ
See Answer →कार्यावस्थाएँ
See Answer →नायक की परिभाषा
See Answer →नाटक के अंग
See Answer →निम्नलिखित का चरित्र-चित्रण कीजिए।
(क) चारूदत्त
(ख) वासवदत्ता
(ग) यक्षणि
(घ) शूद्रक
See Answer →महाकाव्य क्या हैं ? प्रकाश डालें।
See Answer →काव्य की परिभाषा देते हुए काव्य प्रयोजन का विस्तारपूर्वक वर्णन करें।
See Answer →साहित्यदर्पण के अनुसार रस निरूपण का विस्तारपूर्वक वर्णन करें।
See Answer →रस के भेदों पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डालें।
See Answer →श्यामास्वङ, गं, चकितहरिणीप्रेक्षणे दृष्टिपातं,
वक्त्रच्छायां शशिनि, शिखिनां बर्हभारेषु केशान्।
उत्पश्यामि प्रतनुषु नदीवीचिषु भ्रूविलासान्,
हन्तैकस्मिन्क्वचिदपि न ते चण्डि ! सादृश्यमस्ति ।।
See Answer →तस्योत्सङ्गे प्रणयिन इव स्रस्तगङ्गादुकूलां
न त्वं दृष्ट्वा न पुनरलकां ज्ञास्यसे कामचारिन् ।।
या वः काले वहित सलिलोद्गारमुच्चैर्विमाना
मुक्ताजालग्रथितमलकं कामिनीवाभ्रवृन्दम् ।।
See Answer →तामुत्तीर्य व्रज परिचितभ्रूलताविभ्रमाणां
पक्ष्मोत्क्षेपादुपरि विलसत्कृष्णशरप्रभाणाम् ।
कुन्दक्षेपानुगमधुकर श्रीमुषामात्मबिम्बं
पात्रीकुर्वन्दशपुरवधूनेत्र कौतूहलानाम् ।।
See Answer →हारांस्तारांस्तरल गुटिकान् कोटिशः शङ, खुशक्तीः
शष्पश्यामान् मरकतमणीनुन्मयूखप्ररोहान् ।
दृष्ट्वा यस्यां विपणिरचितान् विद्रुमाणां च भङ्गान्
संलक्ष्यन्ते सलिलनिधयस्तोयमात्रावशेषाः ।।
See Answer →तत्याज शस्त्रं विमर्श शास्त्रं
शमं सिष्षेपे नियमं विषेहे ।
वशीव कञ्चिद्विषयं न भेजे
पितेव सर्वान् विषयान् ददर्श ।।
See Answer →संचारपूतानि दिगन्तराणि
कृत्वा दिनान्ते निलयाय गन्तुम्।
प्रचक्रमे पल्लवरागताम्रा
प्रभा पतङ्गस्य मुनेश्च धेनुः ।।
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