ई-गवर्नेन्स तथा भारत में ई-गवर्नेन्स एवं सूचना व संचार प्रौद्योगिकी के कानूनी तथा नीतिगत ढाँचे को परिभाषित कीजिए।
See Answer →विनिवेश नीति की चर्चा कीजिए तथा राज्य स्तर पर इसके प्रभाव को उजागर कीजिए।
See Answer →नीति-मूल्यांकन की विधियों का वर्णन कीजिए।
See Answer →नीति विश्लेषण में उपयोग की जाने वाली विधियों और तकनीकों की व्याख्या कीजिए।
See Answer →इष्टतमीकरण मॉडल की अपेक्षा अनुकरण मॉडल कैसे अधिक उपयुक्त होते हैं?
See Answer →नीति कार्यान्वयन में विभिन्न प्रकार की क्या समस्यायें हैं? नीति कार्यान्वयन के अध्ययन में कई प्रकार के दृष्टिकोणों के अनुसरण की आवश्यकता का औचित्य स्पष्ट कीजिए।
See Answer →नीति वितरण में विभिन्न कार्यान्वयन अभिकरणों की भूमिका का वर्णन कीजिए।
See Answer →"नीति-निर्माण में नागरिक समाज एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।" जाँच कीजिए।
See Answer →लोक नीति निरूपण की बाधाओं को उजागर करते हुए, भारतीय लोक नीति में वर्तमान प्रतिमान परिवर्तन का वर्णन कीजिए।
See Answer →तर्कसंगत नीति-निर्माण मॉडल की जाँच कीजिए।
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नीति विज्ञान के महत्व की चर्चा कीजिए तथा समकालीन संदर्भ में लोक नीति के प्रति उसकी प्रासंगिकता को उजागर कीजिए।
See Answer →वे कौन से पांच क्षेत्र हैं जिनमे कंपनी अधिनियम 2013 के अनुसार कॉरपोरेट सामाजिक उतरदायित्व प्रकटीकरण को वर्गीकृत किया गया है ?
See Answer →अपने हितधारकों के प्रति जिम्मेदारी व्यावसायिक नैतिकता और कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी का मूल सिद्धांत क्यों है ?
See Answer →नैतिक आचार संहिता और कॉरपोरेट सामाजिक उतरदायित्व वाली कम्पनियों के लाभों का पता लगाएं।
See Answer →बेहतर संबंध के लिए निगमों, उसके हितधारकों और अपनाई गई रणनीतियों के बीच संबंधों का अन्वेषण करें।
See Answer →व्यवसाय की कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व रणनीति में मूल्यों की भूमिका का परिक्षण कीजिए।
See Answer →आर्थिक वैश्वीकरण ने सरकार और व्यवसाय के बीच संबंधो को कैसे पुनर्परिभाषित किया है ? भारतीय संदर्भ में सरकार – व्यावसायिक इंटरफेस में हुए परिवर्तनों के साथ अपने दृष्टिकोण को जोड़ें ।
See Answer →व्यावसायिक नैतिकता एक विरोधाभास है। न्यायोचित ठहराइए।
See Answer →इ' अथवा ओ के कितने प्रकार होते हैं आरेख के माध्यम से स्पष्ट करें।
See Answer →निम्नलिखित में तीन सूत्रों की व्याख्या कीजिए।
(1) उगितश्च
(2) एतिस्तुशास्वृदृजुषः क्यप्
(3) ऊ उतः
(4) तुमुण्ण्वुलौ क्रियायां क्रियार्थायाम्
(5) ऋन्नेभ्यो ङीप्
(6) इगुपधज्ञाप्रीकिरः कः