जैन एवं बौद्ध दर्शनों का परिचय दीजिए।
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तर्कसंग्रह के अनुसार पदार्थ की संख्या विषयक मत को बताते हुए पदार्थ की विशेषताओं को स्पष्ट कीजिए।
See Answer →प्रमा को समझाते हुए उसके प्रकारों का वर्णन कीजिए।
See Answer →. परिणामवाद तथा विवर्तवाद को समझाइए ।
See Answer →हेत्वाभास और उसके प्रकारों का वर्णन कीजिए।
See Answer →भारतीय दर्शन की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
See Answer →भारतीय दर्शन में यथार्थवाद क्या है? स्पष्ट विवेचन कीजिए।
See Answer →कुटज' की भाषा
See Answer →निबंध के तत्व
See Answer →'सहस्त्र फणों का मणि-दीप' के कथ्य का विश्लेषण कीजिए।
See Answer →लोभ और प्रीति' के भाव पक्ष का विवेचन कीजिए।
See Answer →त्यागपत्र उपन्यास का सार
See Answer →'नमक का दारोगा कहानी की भाषा-शैली
See Answer →'आकाशदीप' कहानी के प्रमुख पात्रों का परिचय दीजिए।
See Answer →वंशीधर ने अलोपीदीन को आते देखा तो उठ कर सत्कार किया; किंतु स्वाभिमान सहित। समझ गये कि यह महाशय मुझे लज्जित करने और जलाने आये हैं। क्षमा प्रार्थना की चेष्टा नहीं की। वरन् उन्हें अपने पिता की यह ठकुरसुहाती की बात असहृदय-सी प्रतीत हुई। पर पंडित जी की बातें सुनी तो मन की मैल मिट गयी। पंडित जी की ओर उड़ती हुई दृष्टि से देखा। सद्भाव झलक रहा था। गर्व ने लज्जा के सामने सिर झुका दिया। शर्माते हुए बोले-यह आपकी उदारता है जो ऐसा कहते हैं। मुझसे जो कुछ अविनय हुई है उसे क्षमा कीजिए। मैं धर्म की बेड़ी में जकड़ा हुआ था, नहीं तो वैसे मैं आपका दास हूँ। जो आज्ञा होगी, वह मेरे सिर-माथे पर।
See Answer →घर आकर मैंने पत्र सीधा बुआ को दे दिया और वह उसको खोलकर तभी पढ़ने में लग गई। खत बड़ा नहीं था। लेकिन कई मिनट तक वह उसे पढ़ती रही। यह भी भूल गई कि प्रमोद भी उनको कोई है और इस वक्त वह पास ही खड़ा है। काफी देर के बाद उन्होंने वहाँ से आँख हटाई, खत को धीमे-धीमे तह किया और मुझको देखा मानो उस वक्त मुझे वह पहचान नहीं रही थीं। मानों सब भूल गई कि कया था, क्या है, क्या होगा। फिर उसी बेबूझ भाव से मुझे देखते रहकर मानो यंत्र की भाँति उस खत को फाड़कर नन्हें-नन्हें टुकड़ों में कर दिया। मानों वह कुछ नहीं कर रहीं, जाने कौन करा रहा है।
See Answer →दैववाद (Deism)
See Answer →धार्मिक कट्टरता (Religious Fundamentalism)
See Answer →दैववाद (Deism)
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