द्विशालगृह
See Answer →चतुष्षष्टिपदवास्तुमण्डल
See Answer →कार्य के अनुसार गृह में दिक्स्थाननिर्णय का वर्णन कीजिए।
See Answer →गृहारम्भ में खात विचार का स्पष्ट विवेचन कीजिए ।
See Answer →प्रश्नाक्षर के द्वारा भूमि में शल्य का ज्ञान किस प्रकार किया जाता है? स्पष्ट कीजिए।
See Answer →द्वारवेधफलों का विस्तृत वर्णन कीजिए ।
See Answer →नन्द्यावर्तमलिन्दैः शालाकुड्यात प्रदक्षिणान्तगतैः ।
द्वारं पश्चिममस्मिन् विहाय शेषाणि कार्याणि ।।
See Answer →सम्पाता वंशानां मध्यानि समानि यानि च पदानाम् ।
तानि मर्माणि विद्यान्न तानि परिपीडयेत् प्राज्ञः।।
See Answer →प्रागुत्तरोन्नते धनसुतक्षयः सुतवधश्च दुर्गन्धे ।
वक्रे बन्धुविनाशो न सन्ति गर्भाश्च दिङ्मूढे ।।
See Answer →निरूपयामो विदुषां संतुष्ट्यै वास्तुनिर्णयम् ।
यथामति धनारोग्यसौख्यंकीर्तिविवृद्धये ।।
See Answer →'स्तोः श्चुना श्चुः' की सविस्तार व्याख्या कीजिये।
See Answer →'मध्वरिः' की रूपसिद्धि प्रक्रिया लिखिये।
See Answer →'नमः-स्वस्ति-स्वाहा स्वधाऽलं-वषड्योगाच्च' सूत्र की सविस्तार व्याख्या कीजिये।
See Answer →'सुप्तिङन्तं पदम्' सूत्र की सविस्तार व्याख्या कीजिये।
See Answer →'अदर्शनं लोपः' सूत्र की सविस्तार व्याख्या कीजिये।
See Answer →'नदीभिश्च' सूत्र की व्याख्या कीजिये।
See Answer →'राजपुरुषः' पद में कौन सा समास है? स्पष्ट कीजिये।
See Answer →'संयोग' संज्ञा को स्पष्ट कीजिये।
See Answer →'सुध्युपास्यः' की रूपसिद्धि प्रक्रिया लिखिये।
See Answer →'वृद्धि' संज्ञा किन वर्णों की होती है? स्पष्ट कीजिये।
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