मुण्डकोपनिषद् के अनुसार आत्मा की प्राप्ति किन साधनों से संभव है? विस्तार से लिखिए।
See Answer →मुण्डकोपनिषद् के अनुसार 'पराविद्या' और 'अपरा विद्या' में क्या अंतर है उनके महत्व पर प्रकाश डालिए I
See Answer →यथा नद्यः स्यन्दमानाः समुद्रेऽस्तं गच्छन्ति नामरूपे विहाय ।
तथा विद्वान् नामरूपाद्विमुक्तः परात्परं पुरुषमुपैति दिव्यम् ॥
See Answer →सर्वे वेदा यत्पदं आमनन्ति तपांसि सर्वाणि च यद्वदन्ति ।
यदिच्छन्तो ब्रह्मचर्यं चरन्ति तत्ते पदं संग्रहेण ब्रवीमि ओम् इति एतत् ॥
See Answer →सत्यमेव जयते नानृतम् सत्येन पन्था विततो देवयानः ।
येनाक्रमन्त्यृषयो ह्याप्तकामा यत्र तत् सत्यस्य परमं निधानम् ॥
See Answer →शिव संकल्प सूक्त में मन की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
See Answer →सामनस्यम् सूक्त के अनुसार सामजिक सौहार्द का स्वरूप लिखिए।
See Answer →उषा सूक्त के आधार पर उषा देवी का वर्णन कीजिए।
See Answer →हिरण्यगर्भ सूक्त का दार्शनिक महत्त्व लिखिए।
See Answer →वैदिक संस्कृत में स्वर एवं पदपाठ का क्या महत्त्व है? संक्षेप में समझाइए ।
See Answer →वैदिक क्त्वार्थक एवं तुमर्थक प्रत्यय
See Answer →वैदिक शब्दरूप लौकिक संस्कृत के शब्दरूपों से किस प्रकार भिन्न होते हैं? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
See Answer →स्वरित क्या होता है? वैदिक संस्कृत में इसका क्या महत्त्व है? उदाहरण सहित वर्णन कीजिए।
See Answer →प्रावेपा मा बृहतो मादयन्ति प्रवातेजा इरिणे वर्वृतानाः ।
सोमस्येव मौजवतस्य भक्षो विभीदको जागृविर्मह्यमच्छान् ॥
See Answer →अनुव्रतः पितुः पुत्रो मात्रा भवतु संमनाः ।
जाया पत्ये मधुवतीं वाचं वदतु शन्तिवाम् ॥
See Answer →येन कर्माण्यपसो मनीषिणो यज्ञे कृण्वन्ति विदथेषु धीराः ।
यदपूर्वै यक्षमन्तः प्रजानान्तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥
See Answer →उषो वाजेन वाजिनि प्रचेताः स्तोमं जुषस्व गृणतो मघोनि ।
पुराणी देवि युवतिः पुरन्धिरनु व्रतं चरसि विश्ववारे ॥
See Answer →वीथिका प्रमाण
See Answer →कलश चक्र विचा
See Answer →राजगृहप्रमाण
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