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टिप्पणी लिखिए :

राष्ट्रभाषा

 राजभाषा

 केन्द्रीय हिन्दी समिति

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 सार लेखन के सिद्धांत क्या हैं, स्पष्ट कीजिए।

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 प्रारूप लेखन क्या हैं और उसका नमूना बनाइए।

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राजभाषा अधिनियम 1967 पर प्रकाश डालिए।

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कार्यालय ज्ञापन क्या हैं? एक नमूना प्रस्तुत कीजिए ।

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अर्ध सरकारी पत्र क्या हैं? एक नमूना प्रस्तुत कीजिए।

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 प्रशासनिक शब्दावली के निर्माण के सिद्धांत पर प्रकाश डालिए।

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संविधान में राजभाषा अधिनियम 1963 का क्या महत्त्व है?

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 प्रयोजनमूलक हिंदी के विविध रूप के महत्त्व को रेखांकित कीजिए।

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 विषयों पर टिप्पणी लिखिए :

राष्ट्रीय सांस्कृतिक काव्यधारा

हिंदी कहानी के आंदोलन

आदिकालीन साहित्यिक प्रवृत्तियाँ

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प्रेमचंद युगीन हिंदी निम्बन्धकार की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

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द्विवेदी युग में कहानी विधा में हुए विकास का उल्लेख कीजिए।

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विषयों पर टिप्पणी लिखिए

 भारतेन्दु युगीन हिंदी साहित्य

 हिंदी नाटक का विकास

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वल्लभ संप्रदाय तथा राधा वल्लभ संप्रदाय का परिचय दीजिए।

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भारतेन्दु युग में नाटक विधा के विकास के बारे में लिखिए।

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 भक्तिकाल के दार्शनिक पृष्टभूमि की चर्चा कीजिए।

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 विषयों पर टिप्पणी लिखिएः

 सिद्ध काव्य

रीति इत्तर काव्य

 सूफी काव्य

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हिंदी साहित्य के काल विभाजन और नामकरण पर विचार कीजिए।

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नील परिधान बीच सुकुमार खुल

 

रहा मृदुल अधखुला अंग

 

खिला हो ज्यों बिजली का फूल

 

मेघ-बन बीच गुलाबी रंग।

 

आह ! वह मुख ! पश्चिम के व्योम

 

बीच जब घिरते हों घन श्याम

 

अरुण रवि मंडल उनको भेद

 

दिखाई देता हो छविधाम । -

 

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हे साधुओ ! सोये बहुत, अब ईश्वराराधन करो,

 

उपदेश द्वारा देश का कल्याण कुछ साधन करो।

 

डूबे रहोगे और कब तक हाय ! तुम अज्ञान में?

 

चाहो तुम्हीं तो देश की काया पलट दौ आन में।।

 

थे साधु तुलसीदास, नानक, रामदास समर्थ भी

 

व्यवहृत यही पद हो रहा है आज उनके अर्थ भी।

 

पर वे न होकर भी यहाँ उपकार सबका कर रहे,

 

सदभाव उनके ग्रन्थ सबके मानसों में भर रहे

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