बेनी प्रवीन
See Answer →खैर, खून, खाँसी, खुसी, बैर प्रीति मदपान। रहिमन दाबे ना दबें, जानत सकल जहान।।
मूलन ही की जहाँ अधोगति केशव गाइय। होम हुताशन धूम नगर एकै मलिनाइय।। दुर्गति दुर्गति ही जु कुटिल गति सरितन ही में। श्रीफल को अभिलाष प्रगट कवि कुल के जीमें।।
मोर-पंख 'मतिराम किरीट प्रथम, कंठ बानी बनमल सुहाई। मोहन की मुस्कान सुन्दर है, कुण्डल छवि हिलोरे ले रही है। लोचन लोल विशाल बिलोकनि, को ना बिलोकि भयो बस माई। उस मुँह की मिठास कहाँ है? मीठी लगती है नयन-लुनाई।
सांसन ही सों समीर गयो, अरु आंसुन ही सब नीर गयो ठरि। तेज गयो गुन लै अपनो, अरु भूमि गई तन की तनुता करि।। देव जिये मिलिबेही की आस, कि आसहु पास अकास रह्यो भरि। जा दिन ते मुख फेरि, हरे हंसि, हेरि, हियो जु लियो हरि जू हरि।।
See Answer →शारीरिक श्रम
See Answer →स्वदेशी, सर्वोदया और सृजनात्मक कार्यक्रम
See Answer →सहकारिता के मूल तत्व
See Answer →भारत में वर्तमान औद्योगिक विकास के ढाँचे का विश्लेषण कीजिए और आज के संदर्भ में गाँधी के आदर्श का परीक्षण कीजिए।
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दक्षिण अफ्रिका में गाँधी ने किस प्रकार अपने सत्याग्रह आंदोलन को स्वरूप प्रदान किया?
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रोटी के लिए श्रम (ब्रेड लेबर) सिद्धांत की व्याख्या कीजिए। समाज में असमानता और शोषण की समस्या का यह किस प्रकार समाधान करता हैं?
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