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प्रेमचंद और हिंदी कहानी

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अफ्रीकी देशों में कहानी

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हिंदी में कहानी आलोचना

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कहानी के विकास में पत्र-पत्रिकाओं की भूमिका

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विविध भारतीय भाषाओं में आधुनिक कहानी के सूत्रपात पर प्रकाश डालिए।

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जर्मनी और रूस में कहानी विधा के विकास को रेखांकित कीजिए।

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'पराया सुख' कहानी का विश्लेषण कीजिए।

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कहानी और उपन्यास में अंतर स्पष्ट कीजिए

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'कथा' की नई अवधारणा पर प्रकाश डालिए।

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'सवासेर गेहूँ' कहानी का विश्लेषण और मूल्यांकन कीजिए।

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स्वाधीनता आंदोलन के संदर्भ में 'जुलूस' कहानी का विवेचन कीजिए।

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विध्वंस कहानी का विश्लेषण करते हुए उसका मंतव्य स्पष्ट कीजिए।

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प्रेमचंद की कहानी कला पर विचार कीजिए।

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प्रेमचंद के स्त्री संबंधी दृष्टिकोण पर विचार कीजिए।

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स्त्रियाँ गा रही थीं, बालक उछल रहे थे। और पुरुष अपने अँगोछों से यात्रियों को हवा कर रहे थे। इस समारोह में नोहरी की ओर किसी का ध्यान न गया, वह अपनी लठिया पकड़े सब के पीछे सजीव आशीर्वाद बनी खड़ी थी। उसकी आँखे डबडबायी हुई थीं, मुख से गौरव की ऐसी झलक आ रही थी मानों वह कोई रानी है, मानों यह सारा गाँव उसका है, वे सभी युवक उसके बालक हैं। अपने मन में उसने ऐसी शक्ति, ऐसे विकास, ऐसे उत्थान का अनुभव कभी न किया था।

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वंशीधर ने अलोपीदीन को आते देखा तो उठ कर सत्कार किया; किंतु स्वाभिमान सहित। समझ गए कि यह महाशय मुझे लज्जित करने और जलाने आये हैं। क्षमा-प्रार्थना की चेष्टा नहीं की; वरन् उन्हें अपने पिता की यह ठकुरसुहाती की बात असह्य-सी प्रतीत हुई। पर पंडित जी की बातें सुनीं तो मन की मैल मिट गयी। पंडित जी की ओर उड़ती हुई दृष्टि से देखा। सद्भाव झलक रहा था। गर्व ने लज्जा के सामने सिर झुका दिया। शर्माते हुए बोले-यह आपकी उदारता है जो ऐसा कहते हैं। मुझसे जो कुछ अविनय हुई है उसे क्षमा कीजिए। मैं धर्म की बेड़ी में जकड़ा हुआ था नहीं तो वैसे मैं आपका दास हूँ। जो आज्ञा होगी, वह मेरे सिर-माथे पर।

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रूपा को अपनी स्वार्थपरता और अन्याय इस प्रकार प्रत्यक्ष रूप में कभी न देख पड़े थे। वह सोचने लगी- हाय! कितनी निर्दय हूँ। जिसकी सम्पत्ति से मुझे दो सौ रुपया वार्षिक आय हो रही है, उसकी यह दुर्गति ! और मेरे कारण ! हे दयामय भगवान् मुझसे बड़ी भारी चूक हुई है, मुझे क्षमा करो। आज मेरे बेटे का तिलक था। सैकड़ों मनुष्यों ने भोजन पाया। मैं उनके इशारों की दासी बनी रही। अपने नाम के लिए सैकड़ों रुपये व्यय कर दिए; परंतु जिसकी बदौलत हजारों रुपये खाये, उसे इस उत्सव में भी भरपेट भोजन न दे सकी। केवल इसी कारण तो, यह वृद्ध असहाय है।

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'तलाश' कहानी का मूल्यांकन करते हुए उसका महत्व निर्धारित कीजिए।

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 'यही सच है' कहानी की कथा-वस्तु का विश्लेषण प्रस्तुत कीजिए।

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'बदू' कहानी का विश्लेषण और मूल्यांकन कीजिए।

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