Solve your IGNOU Doubts
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भारत में अनेकता में एकता से आप क्या समझते है? चर्चा कीजिए। 

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गुल्ली डंडा कहानी का विश्लेषण करते हुए उसमें अभिव्यक्त जीवन मूल्य को रेखांकित कीजिए।

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'आलोचकों की दृष्टि में प्रेमचंद विषय पर एक निबंध लिखिए।

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प्रेमचंद किसान समस्या को किस प्रकार देखते थे? उदाहरण सहित उत्तर दीजिए।

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अभिसरण।

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विकास लेखांकन।

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 प्रेमचंद की कहानियों में अभिव्यक्त राष्ट्रवाद को स्पष्ट कीजिए।

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लोरेंज वक्र।

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बाजार की विफलता और सरकार की विफलता।

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 पूंजी-वर्धक तकनीकी परिवर्तन और पूंजी सघनीकरण तकनीकी परिवर्तन।

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लाडली को काकी से अत्यंत प्रेम था। बेचारी भोली लड़की थी। बाल-विनोद और चंचलता की उसमें गंध तक न थी। दोनों बार जब उसके माता-पिता ने काकी को निर्द्धता से घसीटा तो लाडली का हृदय ऐंठ कर रह गया। वह झुंझला रही थी कि यह लोग काकी को क्यों बहुत-सी पुड़ियाँ नहीं दे देते। क्या मेहमान सब की सब खा जायेंगे? और यदि काकी ने मेहमानों के पहले खा लिया तो क्या बिगड़ जाएगा? वह काकी के पास जा कर उन्हें धैर्य देना चाहती थी, परंतु माता के भय से न जाती थी। उसने अपने हिस्से की पूरियाँ बिल्कुल न खायी थीं। अपनी गुड़िया की पिटारी में बन्द कर रक्खी थी। उन पूड़ियों को काकी के पास ले जाना चाहती थी। उसका हृदय अधीर हो रहा था! बूढ़ी काकी मेरी बात सुनते ही उठ बैठेंगी, पूरियाँ देख कर प्रसन्न होंगी ! मुझे खूब प्यार करेगी?

पंडित अलोपीदीन का लक्ष्मी जी पर अखंड विश्वास था। वह कहा करते थे कि संसार का तो कहना ही क्या, स्वर्ग में भी लक्ष्मी का ही राज्य है। उनका यह कहना यथार्थ ही था। न्याय और नीति सब लक्ष्मी के ही खिलौने हैं, इन्हें वह कैसे चाहतीं हैं नचाती है। लेटे ही लेटे गर्व से बोले चलो हम आते हैं। यह कह कर पंडित जी ने बड़ी निश्चिंता से पान के बीडे लगा कर खाये। फिर लिहाफ ओढ़े हुए दरोगा के पास आ कर बोले, बाबू जी आशीर्वाद् कहिए, हमसे ऐसा कौन-सा अपराध हुआ कि गाड़ियों रोक दी गयीं। हम ब्राह्मणों पर तो आपकी कृपा-दृष्टि रहनी चाहिए।

क्रिया के पश्चात् प्रतिक्रिया नैसर्गिक नियम है। शंकर साल भर एक तपस्या करने पर भी जब ऋण से मुक्त होने में सफल न हो सका तो उसका संयम निराशा के रूप में परिणत हो गया। उसने समझ लिया कि जब इतना कष्ट सहने पर भी साल भर में साठ रुपये से अधिक न जमा कर सका तो अब और कौन सा उपाय है जिसके द्वारा इसके दूने रुपये जमा हों। जब सिर पर ऋण का बोझ ही लादना है तो क्या मन भर का और क्या सवा मन का। उसका उत्साह क्षीण हो गया, मिहनत से घृणा हो गयी। आशा उत्साह की जननी है, आशा में तेज है, बल है, जीवन है। आशा ही संसार की संचालक शक्ति है। शंकर आशा-हीन होकर उदासीन हो गया।

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बहिर्जात विकास और अंतर्जात विकास।

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केनेथएरो के करके सीखना मॉडल की व्याख्या कीजिए।

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 प्राकृतिक एकाधिकार से आप क्या समझते हैं? जनउपयोगी सेवाएँ आमतौर पर प्राकृतिक एकाधिकार क्यों होती हैं?

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 लोकतंत्र के चार उदारवादी सिद्धांतों के महत्व की चर्चा कीजिए।

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 आर्थिक असमानता की अवधारणा की व्याख्या करें। आर्थिक असमानता को मापने की विभिन्न विधियों की व्याख्या कीजिए।

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 आर्थिक संवृद्धि के क्लासिकल सिद्धांत की चर्चा कीजिए। संवृद्धि के क्लासिकल सिद्धांत की मार्क्सवादी आलोचना की चर्चा कीजिए।

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 Exchange of scientific knowledge

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 Benefits of economic integration

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 City Branding and Place Marketing

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