Solve your IGNOU Doubts
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Question:

 

 भारतीय इतिहास और कालगणना के बीच संबंध स्पष्ट कीजिए। विशेष रूप से सृष्टि संवत् का इतिहास के साथ क्या सम्बन्ध है, इसे समझाइए।

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Question:

पुरातत्त्व आधारित काल निर्धारण की सीमाएँ और आलोचनात्मक दृष्टि से संभावित समस्याएँ वर्णित कीजिए।

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Question:

सृष्टि संवत्, कलि संवत् और युधिष्ठिर संवत् के कालक्रम को स्पष्ट कीजिए। यह बताइए कि इन संवतों का ऐतिहासिक घटनाओं और भारतीय समाज के समयबोध पर क्या प्रभाव पड़ा।

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Question:

 

प्लेट टैक्टोनिक्स सिद्धांत का संक्षिप्त परिचय दीजिए। इसके आधार पर पृथ्वी के भूगर्भीय युगों और समय गणना में योगदान बताइए। साथ ही, इस सिद्धांत की प्रमुख सीमाएँ/limitations और विवादों पर चर्चा कीजिए।

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 वृहत्संहिता और पंचसिद्धांतिका में वर्णित कालगणना पद्धतियों का विश्लेषण कीजिए। इसमें किस प्रकार सूर्य और ग्रहों के चक्र को समय मापन में उपयोग किया गया, इसे उदाहरण सहित समझाइए।

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Question:

1750 का कैलेण्डर अधिनियम क्यों ऐतिहासिक माना जाता है?

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Question:

कैलेण्डर सुधार समिति के गठन का उद्देश्य क्या था और इसका भारतीय समाज पर क्या प्रभाव पड़ा?

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Question:

ग्रेगोरियन कैलेण्डर और हिजरी कैलेण्डर में मुख्य अंतर संक्षेप में स्पष्ट कीजिए।

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Question:

‘कैलेण्डर’ शब्द का शाब्दिक और वैज्ञानिक अर्थ क्या है?

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Question:

लू-पंचांग किस प्रकार का कैलेण्डर है और इसका उपयोग कहाँ होता है?

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Question:

भारतीय पंचांग में चान्द्र-सौर समन्वय क्यों आवश्यक है?

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विश्व के प्रमुख कैलेण्डरों (जैसे माया, चीन, मिश्र, ग्रीक) का उद्भव और विकास स्पष्ट कीजिए और विश्लेषण कीजिए कि इनमें भारतीय कालगणना का क्या प्रभाव रहा।

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Question:

सूर्यसिद्धांत, सिद्धांत शिरोमणि और आर्यभटीयम् में प्रस्तुत कालगणना की पद्धतियों की तुलना कीजिए। यह स्पष्ट कीजिए कि इन ग्रंथों में खगोलीय अवलोकनों और गणित का क्या योगदान है।

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Question:

रोमन से ग्रेगोरियन कैलेण्डर तक की विकास-यात्रा को उदाहरण बनाकर समझाइए कि कैलेण्डर सुधार इतिहास में एक वैज्ञानिक अनिवार्यता कैसे बनता है।

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 कैलेण्डर समिति और शक संवत् के सन्दर्भ में यह स्पष्ट कीजिए कि आधुनिक भारत में कैलेण्डर सुधार की आवश्यकता क्यों पड़ी और इसके पीछे कौन से वैज्ञानिक व राष्ट्रीय उद्देश्य थे।

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Question:

 

भारतीय नववर्ष परम्पराओं की विविधता का अध्ययन करते हुए स्पष्ट करें कि विभिन्न क्षेत्रों में भिन्न नववर्ष होने के बावजूद कालगणना की मूल संरचना एक कैसे है।

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Question:

भारतीय पंचांग परम्परा को 'कैलेण्डर' न मानकर 'काल-विज्ञान की प्रणाली' के रूप में सिद्ध कीजिए। नवविध कालमान और वर्ष-समन्वय के आधार पर विवेचन कीजिए।

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Question:

मुण्डक उपनिषद् में वर्णित 'द्वा सुपर्णा सयुजा सखाया' रूपक की दार्शनिक व्याख्या करते हुए जीव, आत्मा और परमात्मा के सम्बन्ध का समीक्षात्मक विश्लेषण कीजिए ।

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Question:

 

मुण्डक उपनिषद् में प्रतिपादित 'परा विद्या' और 'अपरा विद्या' के सिद्धान्त का आलोचनात्मक विवेचन कीजिए ।

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Question:

नायमात्मा प्रवचनेन लभ्यो न मेधया न बहुना श्रुतेन।

यमेवैष वृणुते तेन लभ्यस्तस्यैष आत्मा विवृणुते तनूं स्वाम् ॥

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