भारतीय परम्परा में भूमण्डल-केन्द्रित दृष्टिकोण का आधार क्या है? सौरमण्डल, भू-भ्रम और काल-निर्धारण के परस्पर सम्बन्ध का विश्लेषण कीजिए।
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सेमेटिक मतों तथा आधुनिक विज्ञान में काल की अवधारणा का परिचय देते हुए भारतीय काल-चिंतन से उसकी मूलभूत भिन्नताओं का आलोचनात्मक अध्ययन कीजिए।
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पौराणिक, जैन एवं बौद्ध परम्पराओं में काल की अवधारणा किस प्रकार वैदिक चिंतन का विस्तार या पुनर्व्याख्या है? दार्शनिक आधार स्पष्ट कीजिए।
See Answer →काल की अवधारणा में भारतीय दर्शन से लेकर पौराणिक साहित्य तक क्या समानता पाई जाती है? उदाहरणों के साथ विवेचना करें।
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भारतीय दर्शन ग्रन्थों में काल की सत्ता और स्वरूप पर हुए विचारों का तुलनात्मक विश्लेषण कीजिए।
See Answer →भारतीय वेधशालाएँ कालगणना की वैज्ञानिकता को कैसे प्रमाणित करती हैं?
See Answer →चतुर्युग और मन्वन्तर में क्या अंतर है?
See Answer →अयन और संवत्सर का कालगणना में क्या स्थान है?
See Answer →अधिमास और क्षयमास क्यों जोड़े जाते हैं?
See Answer →मुहूर्त की अवधारणा को सामाजिक-सांस्कृतिक दृष्टि से क्यों महत्त्वपूर्ण माना गया?
See Answer →सूक्ष्म काल इकाइयों (निमिष, त्रुटि, लव, काष्ठा) की आवश्यकता क्यों पड़ी?
See Answer →ब्राह्म वर्ष, विष्णु वर्ष, शिव वर्ष एवं दैवी वर्ष की अवधारणा का विश्लेषण कीजिए तथा कालगणना में इनके प्रतीकात्मक एवं वैज्ञानिक पक्ष पर चर्चा कीजिए ।
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भास्कराचार्य के प्रमुख ग्रंथों का उल्लेख कीजिए और उनकी कालगणना/खगोलशास्त्र में योगदान संक्षेप में बताइए।
See Answer →भारतीय मास-प्रणाली (चतुर्विध मास, अधिमास, क्षय मास) के सिद्धांतों को स्पष्ट करते हुए सिद्ध कीजिए कि यह व्यवस्था काल-सामंजस्य की एक वैज्ञानिक विधि है ।
See Answer →पक्ष, ग्रहण और ऋतु-चक्र की अवधारणा को पृथ्वी–चन्द्र–सूर्य की गतियों के आधार पर समझाइए तथा भारतीय कालगणना में उनके महत्त्व का विश्लेषण कीजिए ।
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विक्रम संवत् का ऐतिहासिक महत्व और इसका प्रयोग भारतीय इतिहास में कैसे हुआ, इसे समझाइए।
See Answer →भारतीय पंचांग पद्धति में ‘दिन’ की संकल्पना पश्चिमी दिन-गणना से किस प्रकार भिन्न है? नामकरण, आधार एवं व्यावहारिक उपयोग के सन्दर्भ में विश्लेषण कीजिए।
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महाभारत के काल और उससे जुड़े संवतों का इतिहास स्पष्ट कीजिए। इसे भारतीय ऐतिहासिक घटनाओं से जोड़कर उदाहरण दीजिए।
See Answer →तिथि-प्रणाली की विशेषताओं को स्पष्ट करते हुए ‘क्षय तिथि’ एवं ‘अधिक तिथि’ की अवधारणा का खगोलीय एवं गणनात्मक आधार सहित विवेचन कीजिए ।
See Answer →भारतीय कालमान की संरचना (क्षण से कल्प तक) का दार्शनिक एवं वैज्ञानिक विश्लेषण कीजिए तथा बताइए कि यह पद्धति भारतीय काल-बोध को कैसे अभिव्यक्त करती है ।
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