Solve your IGNOU Doubts
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मेरे राम का मुकुट भीग रहा है निबंध की अन्तर्वस्तु पर चर्चा कीजिए।

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'संस्कार और भावना' एकांकी के पात्रों पर विचार कीजिए।

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"शतरंज के खिलाड़ी" कहानी के प्रतिपाद्य को स्पष्ट कीजिए।

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'ध्रुवस्वामिनी नाटक के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आधुनिक परिवेश का मूल्यांकन कीजिए।

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निर्मला' उपन्यास की कथावस्तु की विशेषता बताइए।

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हिंदी उपन्यास की विकास यात्रा पर विस्तार से चर्चा कीजिए।

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निम्नलिखित में से किन्हीं तीन गद्यासों की संदर्भ व्याख्या कीजिए।

 

(क) चार दिन तक पलक नहीं झेंपी। बिना फेरे घोड़ा बिगड़ता है और बिना लड़े सिपाही। मुझे तो संगीन चढ़ाकर मार्च का हुक्म मिल जाए। फिर सात जर्मनों को अकेला मारकर न लौटू, तो मुझे दरबार साहब की देहली पर मत्था टेकना नसीब न हो।

 

(ख) महाराज दहेज की बातचीत ऐसे सत्यवादी पुरुषों से नहीं की जाती। उनसे संबंध हो जाना ही लाख रुपये के बराबर है। में इसी को अपना अहोभाग्य समझता हूँ। हां! कितनी उदार आत्मा थी। रुपयें को तो उन्होंने कुछ समझा ही नहीं। तिनके के बराबर की परवाह नहीं की। बुरा रिवाज है, बेहद बुरा। मेरा बस चले तो दहेज लेने वालों और देने वालों को गोली मार दूं फिर चाहे फॉसी ही क्यों न हो जाए। पूछो आप लड़के का विवाह करते हैं कि उसे बेचते हैं? अगर आपको लड़के की शादी में दिल खोलकर खर्च करने का अरमान है तो शौक से खर्च कीजिए लेकिन जो कुछ कीजिए अपने बल पर। यह क्या कि कन्या के पिता का गला रेतिए ! नेचता है, घोर नीचता! मेरा बस चले, तो इन पाजियों को गाली मार दूँ।

 

(ग) जी हाँ में कॉलेज में पढ़ी हूँ। मैंने बी.ए पास किया है। कोई पाप नहीं किया, चोरी नहीं की और न आपके पुत्र की तरह ताक-झांक कर कायरता दिखाई है। मुझे अपनी इज्जत अपने मान का ख्याल तो है। लेकिन इनसे पूछिए कि ये किस तरह नौकरानी के पैरों पर पड़कर अपना मुंह छिपा कर भागे थे।

 

(घ) राजनीति? राजनीति ही मनुष्यों के लिए सब कुछ नहीं। राजनीति के पीछे नीति से भी हाथ न धो बैठो, जिसका विश्व मानव के साथ व्यापक संबंध है। राजनीति की साधारण छलताओं से सफलता प्राप्त करके क्षण भर के लिए तुम अपने को चतुर समझ लेने की भूल कर सकते हो। परन्तु इस भीषण संसार में प्रेम करने वाले हृदय को खो देना, सबसे बड़ी हानि है। शकराज! दो प्यार करने वाले हृदयों के बीच में स्वर्गीय ज्योति का निवास है।

 

(ड.) यदि हम थोड़ा भी अपनी मनोवृत्ति स्थिर कर अवाक् हो अपने मन के साथ बातचीत कर सकें तो अति भाग्य। एक वाक्शक्ति मात्र के दमन से न जानिए कितने प्रकार का दमन हो गया। हमारी जिल्ह्या जो कतरनी के समान सदा स्वच्छंद चला करती है। उसे यदि हमने दबाकर काबू में कर लिया वो कोधादिक बड़े-बड़े अजेय शत्रुओं को बिन प्रयास जीत अपने वश की डाला।

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(क) निराला का रचना-विधान

 

(ख) कुरुक्षेत्र का प्रतिपाद्य

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नई कविता के अर्थ को स्पष्ट करते हुए नई कविता की प्रमुख प्रवृत्तियों का उल्लेख कीजिए।

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प्रगतिवाद की अन्तर्वस्तु पर प्रकाश डालिए।

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घनानंद के काव्य में निरुपित प्रेम भाव पर अपना पक्ष रखिए।

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 तुलसीदास की कविता के भाव-पक्ष पर विचार कीजिए।

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आदिकाव्य की प्रतिनिधि रचनाओं पर विस्तार से चर्चा कीजिए।

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निम्नलिखित पद्यांशों की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए:

 

(क) बूझत स्याम कौन तू गोरी।

 

मौसी कहाँ रहती है बेटी, मैंने तो ब्रज खोरी नहीं देखी। क्योंकि हम ब्रज-तन आवर्ती, बजाते अपनी पौरी। सुनत रहरति स्त्रावनि नंद दोता, करत फिरत मखंडधि छोरी। हम तुम्हारे चारों को कहाँ ले जायेंगे, आओ मिलकर खेलें। सूरदास प्रभु रसिक (-)सिरमनि बतानि मुरह राधिका भोरी।

 

(ख) जाके प्रिय न राम वैदेही।

 

से छड़िए कोटि बैरी समजदपि परम सनेही। तज्यो पिता प्रहलाद विभीषण बंधु भरत महतारी। बलि गुरु तज्यों कंत ब्रज वनतनि भये जग मंगलकारी। नाते नेह राम के मनियत सुहृद सुसंव्य जहाँ लों। अंजन कहा आंखि तेहि फूट बहुतक कहाँ कहाँ लो। तुलसी सो सब भांति परम हित पूज्य प्राण ते प्यारो। जासों होय सनेह राम पद ये तो मतो हमारो।

 

(ग) रहिमन पानी बिन राखिए सब सून। पानी गये न ऊबे मोती मन चून।

 

(घ) हिमाद्री तुंग श्रृंग से

 

प्रबुद्ध शुद्ध भारत आत्म-तेज उज्ज्वल स्वतंत्रता आह्वान अमर वीर पुत्र, दृढ़-प्रतिज्ञा सोच, असंख्य यश-किरणें बिखरी दिव्य जलती हुई मातृभूमि के पुत्रों की तरह रुको मत करो वीर साहसी मत करो। आरती सैन्य-सिंधु में-सुवद्वा की अग्नि से जलो, निपुण बनो-बढ़ो, बढ़ो, बढ़ो।

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शुक्ल युगीन निबंध

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 हिंदी गीत नाटक

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अलंकार के भेद

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शब्द शक्ति के प्रकार

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 रस के भेद

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प्रेमचंद युगीन हिंदी कहानी पर एक निबंध लिखिए।

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